ज़मीन की नाप कब करवानी चाहिए
- प्लॉट या खेत ख़रीदने से पहले, ताकि काग़ज़ में लिखा रकबा और मौके की ज़मीन मिलान हो जाए
- परिवार में ज़मीन के बँटवारे के समय, हर हिस्से का रकबा और सीमा तय करने के लिए
- मकान, दुकान या बाउंड्री वॉल बनाने से पहले
- पड़ोसी से सीमा का विवाद या कब्ज़े (अतिक्रमण) की शंका होने पर
- बैंक लोन, वकील या कोर्ट के लिए नापा हुआ नक्शा चाहिए हो
- कॉलोनी में प्लॉटिंग या सड़क और नाली का लेआउट बनाने के लिए
सरकारी सीमांकन और प्राइवेट सर्वे में फ़र्क
ज़मीन का सरकारी सीमांकन राजस्व विभाग करता है: लेखपाल, कानूनगो और तहसील। खेती की ज़मीन पर सीमा विवाद हो तो उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 24 के तहत उपजिलाधिकारी (SDM) के यहाँ आवेदन होता है।
प्राइवेट सर्वे सरकारी सीमांकन की जगह नहीं लेता, पर बहुत काम आता है। हम मशीन से हर कोने के निर्देशांक (coordinates) लेते हैं, सही रकबा निकालते हैं और नक्शा बनाते हैं। इससे ख़रीद-बिक्री, बँटवारा और निर्माण की योजना पक्के आँकड़ों पर होती है। सरकारी नाप के समय हम आपके साथ मौजूद रहकर बिंदु दिखा सकते हैं, ताकि दोनों पक्ष एक ही बिंदु देखें।
किन काग़ज़ों की ज़रूरत होती है
- खतौनी: UP भूलेख से निकाल सकते हैं
- गाटा (खसरा) नंबर, गाँव, तहसील और ज़िले का नाम
- गाँव का नक्शा: UP भू-नक्शा से, या रजिस्ट्री का नक्शा
- बैनामा (रजिस्ट्री) की कॉपी, अगर ज़मीन ख़रीदी गई है
- पड़ोसी गाटा नंबर, और पहले कोई नाप हुई हो तो उसकी रिपोर्ट
- मौके की Google Maps लोकेशन (WhatsApp पर भेज दें)
हमारा तरीका
- काग़ज़ देखना: खतौनी, गाटा नंबर और गाँव का नक्शा
- मौके के पास DGPS से कंट्रोल पॉइंट बनाना
- टोटल स्टेशन या RTK रोवर से सीमा, सड़क, मेड़ और निर्माण की नाप
- नाप को गाँव के नक्शे से मिलाना
- सीमा बिंदुओं पर खूँटी या पिलर से निशान (पिलर का खर्च अलग)
- AutoCAD नक्शा (PDF में भी), हर बिंदु के निर्देशांक और Google Earth की KML फ़ाइल
रकबा किस इकाई में मिलता है
हम रकबा वर्ग मीटर, हेक्टेयर और एकड़ में देते हैं। 1 हेक्टेयर = 10,000 वर्ग मीटर = 2.471 एकड़, और 1 एकड़ = 4,046.86 वर्ग मीटर। बीघा और बिस्वा हर इलाके में अलग होते हैं, इसलिए आपकी तहसील में जो माप चलता है वह बता दें, हम उसमें भी लिख देंगे।
प्रयागराज में कहाँ-कहाँ काम करते हैं
प्रयागराज की सभी तहसीलें: सदर, सोरांव, फूलपुर, हंडिया, करछना, मेजा, कोरांव और बारा। शहर में नैनी, झूँसी, फाफामऊ, झलवा और बमरौली समेत पूरा इलाका।
आसपास के ज़िले: कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्ज़ापुर, भदोही, जौनपुर और वाराणसी।
English में जानकारी: Land survey & boundary demarcation · Land surveyor in Prayagraj
हमारी सेवाएँ (Services)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
ज़मीन की नाप का खर्च कितना आता है?
खर्च रकबे, सीमा बिंदुओं की गिनती, ज़मीन की बनावट और ज़रूरी नक्शों पर निर्भर करता है। गाटा नंबर, अंदाज़न रकबा और लोकेशन WhatsApp पर भेजें, हम कोटेशन भेज देंगे।
क्या आपकी नाप लेखपाल की नाप की जगह मानी जाएगी?
नहीं। सरकारी सीमांकन राजस्व विभाग करता है। हमारी नाप से आपको सही निर्देशांक, रकबा और नक्शा मिलता है, जो योजना, ख़रीद-बिक्री और सरकारी नाप के समय काम आता है।
गंगा या यमुना किनारे की ज़मीन में क्या ध्यान रखें?
नदी किनारे की ज़मीन का किनारा बाढ़ के बाद बदल सकता है और निचला हिस्सा डूब सकता है। ऐसी ज़मीन में हम सीमा के साथ लेवल (ऊँचाई) भी लेते हैं, ताकि नक्शे पर निचला हिस्सा साफ़ दिखे।
क्या आप गाँव की खेती की ज़मीन भी नापते हैं?
हाँ। शहर के प्लॉट और गाँव की खेती की ज़मीन, दोनों की नाप करते हैं, प्रयागराज की हर तहसील में।
